तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ हैं तुमको मेरी बात और हैं मैंने तो मोहोब्बत की हैं – साहिर लुधियानवी


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तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ हैं तुमको
मेरी बात और हैं मैंने तो मोहोब्बत की हैं

मेरे दिल की मेरे जज़बात की कीमत क्या हैं
उलझे उलझे से खयालात की कीमत क्या हैं
मैंने क्यों प्यार किया तुमने ना क्यों प्यार क्या
इन परेशान सवालात की कीमत हैं
तुम जो ये भी ना बताओ तो ये हक़ हैं तुमको
मेरी बात और हैं मैंने तो मोहोब्बत की हैं

जिन्दगी सिर्फ मोहोब्बत नही कुछ और भी हैं
जुल्फ-ओ-रुखसार की जन्नत ही नहीं कुछ और भी हैं
भूख और प्यास की मारी हुयी इस दुनियाँ में
इश्क ही एक हकीकत नहीं कुछ और भी हैं
तुम अगर आँख चुराओ तो ये हक़ हैं तुमको
मैंने तुम से ही नहीं सब से मोहोब्बत की हैं

तुमको दुनियाँ के ग़म-ओ-दर्द से फुरसत ना सही
सबसे उल्फत सही मुझसे ही मोहोब्बत ना सही
मैं तुम्हारी हूँ यही मेरे लिये क्या कम हैं
तुम मेरे हो के रहो ये मेरी किस्मत ना सही
और भी दिल को जलाओ तो ये हक़ हैं तुमको
मेरी बात और हैं मैंने तो मोहोब्बत की हैं

– साहिर लुधियानवी

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कुछ दिल ने कहा…


sharmila

कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं…
ऐसी भी बातें होती हैं,
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं…

लेता है दिल अंगड़ाइयां, इस दिल को समझाये कोई
अरमान ना आँखें खोल दें, रुसवा ना हो जाये कोई
पलकों की ठंडी सेज पर, सपनों की परियां सोती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं,
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं…

दिल की तस्सली के लिये, झूठी चमक झूठा निखार
जीवन तो सूना ही रहा, सब समझे आयी हैं बहार
कलियों से कोई पूछता, हंसती हैं वो या रोती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं,
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं…

चली गोरी पी से मिलन को चली…..






चली गोरी पी से मिलन को चली
चली गोरी पी से मिलन को चली
नैना बावरिया मान में संवरिया

चली गोरी पी से मिलन को चली
चली गोरी पी से मिलन को चली
नैना बावरिया मान में संवरिया
चली गोरी पी से मिलन को चली
चली गोरी पी से मिलन को चली

दार के कजरा लट बिखरा के
दार के कजरा लट बिखरा के
ढलते दीं को रात बनाके
कंगना खनकती बिंदिया चमकती
कंगना खनकती बिंदिया चमकती
चम् चम् डोले सजना की गली
चली गोरी पी से मिलन को चली
चली गोरी पी से मिलन को चली
नैना बावरिया मान में संवरिया
चली गोरी पी से मिलन को चली
चली गोरी पी से मिलन को चली

कोमल तन है सांवल काया
हो गयी बैरन अपनी ही छाया
कोमल तन है सांवल काया
हो गयी बैरन अपनी ही छाया
घूंघट खोले ना मुख से बोले ना
घूंघट खोले ना मुख से बोले ना
राह चलत संभली संभली

चली गोरी पी से मिलन को चली
चली गोरी पी से मिलन को चली
नैना बावरिया मान में संवरिया

चली गोरी पी से मिलन को चली
चली गोरी पी से मिलन को चली

मीठे बोल बोले …


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मीठे बोल बोले, बोले पायलिया
छूम-छनन बोले, झनक-झन बोले
मीठे बोल बोले …

पग पग नाचे रे, घुंघरु की दासी
इक पग राधा जैसी, इक पग मीरा जैसी
सांवरे की बोली बोले
पायलिया बोले
मीठे बोल बोले …

नैनों की बाँसुरी, कोई सुनाए
अँखियों की ज्योती से, ज्योत जलाए
बावरे से ढोली ढोले
पायलिया बोले
मीठे बोल बोले …

चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला – गुलाम अली


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चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी आवारगी ने मुझको आवारा बना डाला

बड़ा दिलकश बड़ा रंगीन है ये शहर कहते हैं
यहाँ पर हैं हजारों घर घरों में लोग रहते हैं
मुझे इस शहर ने गलियों का बंजारा बना डाला

चमकते चाँद को…

मैं इस दुनिया को अक्सर देखकर हैरान होता हूँ
न मुझसे बन सका छोटा सा घर दिन रात रोता हूँ
ख़ुदाया तूने कैसे ये जहां सारा बना डाला

चमकते चाँद को…

मेरे मालिक मेरा दिल क्यों तड़पता है सुलगता है
तेरी मर्ज़ी तेरी मर्ज़ी पे किसका ज़ोर चलता है
किसी को गुल किसी को तूने अंगारा बना डाला

चमकते चाँद को…

यही आग़ाज़ था मेरा यही अंजाम होना था
मुझे बरबाद होना था मुझे नाकाम होना था
मुझे तक़दीर ने तक़दीर का मारा बना डाला

चमकते चाँद को…