कुछ दिल ने कहा…


sharmila

कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं…
ऐसी भी बातें होती हैं,
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं…

लेता है दिल अंगड़ाइयां, इस दिल को समझाये कोई
अरमान ना आँखें खोल दें, रुसवा ना हो जाये कोई
पलकों की ठंडी सेज पर, सपनों की परियां सोती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं,
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं…

दिल की तस्सली के लिये, झूठी चमक झूठा निखार
जीवन तो सूना ही रहा, सब समझे आयी हैं बहार
कलियों से कोई पूछता, हंसती हैं वो या रोती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं,
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं…

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ये नयन डरे डरे…. – हेमंतकुमार


ये नयन डरे डरे, ये जाम भरे भरे
ज़रा पीने दो
कल की किसको खबर, इक रात होके निडर
मुझे जीने दो
ये नयन डरे डरे …

रात हसीं ये चाँद हसीं
पर सबसे हसीं मेरे दिलबर,
और तुझसे हसीं, और तुझसे हसीं तेरा प्यार
तू जाने ना
ये नयन डरे डरे …

प्यार मे है जीवन की खुशी
देती है खुशी कई गम भी,
मै मान भी लूँ, मै मान भी लूँ कभी हार
तू माने ना
ये नयन डरे डरे …

मेरे दिल में तू ही तू है – जगजीत-चित्रा


मेरे दिल में तू ही तू है, दिल की दवा क्या करूँ
दिल भी तू है जाँ भी तू है, तुझपे फ़िदा क्या करूँ
मेरे दिल में तू ही तू है, दिल की दवा क्या करूँ

खुद को खो के तुझको पाकर क्या-क्या मिल क्या कहूँ
तेरी होके जीने में क्या आय मज़ा क्या कहूँ
कैसे दिन हैं कैसी रातें कैसी फ़िज़ा क्या कहूँ
मेरी होके तूने मुझको क्या क्या दिया क्या कहूँ
मेरे पहलू में जब तू है फिर मैं दुआ क्या करूँ
दिल भी तू है जाँ भी तू है तुझपे फ़िदा क्या करूँ
मेरे दिल में तू ही तू है, दिल की दवा क्या करूँ

है ये दुनिया दिल की दुनिया मिलके रहेंगे यहाँ
लूटेंगे हम खुशियाँ हर पल दुःख न सहेंगे यहाँ
अरमानो के चंचल धारे ऐसे बहेंगे यहाँ
ये तो सपनो की जन्नत है, सब ही कहेंगे यहाँ
ये दुनिया मेरे दिल में बसी है, दिल से जुदा क्या करूँ
दिल भी तू है जाँ भी तू है, तुझपे फ़िदा क्या करूँ
मेरे दिल में तू ही तू है, दिल की दवा क्या करूँ

तेरी खुश्बुमे बसे खत – कैफी आजमी


This gazal is so special to me. You must listen it. Hope you all like it. 🙂

जिनको दुनियाकी निगाहोंसे छुपाये रखा,
जिनको एक उम्र कलेजेसे लगाए रखा,
दिल जिसे तुंने ईमान बनाए रखा

तुने दुनियाकी निगाहोसे बचकर लिखे,
साल हा साल मेरे नाम बराबर लिखे,
कभी दिनमें तो कभी रातको उठकर लिखे,

तेरी खुश्बुमे बसे खत मैं जलाता कैसे,
प्यारर्मे डुबे हुए खत मैं जलाता कैसे,
तेरे हाथोंसे लिखे खत मैं जलाता कैसे,

तेरे खत आज मैं गंगामे बहा आया हुं,
आग बेह्ते हुए पानीमे लगा आया हुं…….