Category Archives: लता मंगेशकर

कुछ दिल ने कहा…


कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं… ऐसी भी बातें होती हैं, कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं… लेता है दिल अंगड़ाइयां, इस दिल को समझाये कोई अरमान ना आँखें खोल दें, रुसवा ना हो जाये कोई पलकों की … Continue reading

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मीठे बोल बोले …


मीठे बोल बोले, बोले पायलिया छूम-छनन बोले, झनक-झन बोले मीठे बोल बोले … पग पग नाचे रे, घुंघरु की दासी इक पग राधा जैसी, इक पग मीरा जैसी सांवरे की बोली बोले पायलिया बोले मीठे बोल बोले … नैनों की … Continue reading

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रिम-झिम गिरे सावन. . . . . .


लत्ता मंगेशकर : रिम-झिम गिरे सावन, सुलग सुलग जाए मन भीगे आज इस मौसम में, लगी कैसी ये अगन रिम-झिम गिरे सावन … पहले भी यूँ तो बरसे थे बादल, पहले भी यूँ तो भीगा था आंचल अब के बरस … Continue reading

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ठुमक चलत रामचंद्र…


    ठुमक चलत रामचंद्र ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां… ठुमक चलत रामचंद्र किलकि किलकि उठत धाय गिरत भूमि लटपटाय . धाय मात गोद लेत दशरथ की रनियां .. अंचल रज अंग झारि विविध भांति सो दुलारि . तन मन … Continue reading

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दिल ढूँढता है फिर वही…….


दिल ढूँढता है फिर वही फ़ुरसत के रात दिन, बैठे रहे तसव्वुर-ए-जानाँ किये हुए दिल ढूँढता है फिर वही फ़ुरसत के रात दिन… जाड़ों की नर्म धूप और आँगन में लेट कर, आँखों पे खींचकर तेरे आँचल के साए को … Continue reading

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इतना न मुझसे तू प्यार बढ़ा…..


इतना न मुझसे तू प्यार बढ़ा के मैं एक बादल आवारा कैसे किसी का सहारा बनूँ के मैं खुद बेघर बेचारा इतना न… मुझे एक जगह आराम नहीं रुक जाना मेरा काम नहीं मेरा साथ कहाँ तक दोगी तुम मै … Continue reading

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रजनीगंधा फूल तुम्हारे


रजनीगंधा फूल तुम्हारे महके यूँ ही जीवन में ओ… जैसे महके प्रीत पिया की मेरे अनुरागी मन में रजनीगंधा… अधिकार ये जबसे साजन का हर धड़कन पर माना मैंने मैं जबसे उनके साथ बंधी ये भेद तभी जाना मैंने कितना … Continue reading

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