शहर


सालों पहेले यहाँ एक जंगल हुआ करता था…
घना भयानक जंगल.
फिर यहाँ एक शहर बन गया! घना भयानक शहर!
जंगल जितना सुहाना था उतना ही शहर है
वहां चिर-फाड़-खानेवाले जानवर थे
यहाँ शहरी दरिंदे!
जंगल का कानून सब के लिए एक था
की कोई कानून नहीं –
यहाँ कानून है – उन को बचाने, आप को डराने के लिए!
तब का घना भयानक जंगल भी
और आज का सुहाना शहर भी –
आप को अन्दर खींचता है और खा जाता है!

–  किरण त्रिवेदी

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तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ हैं तुमको मेरी बात और हैं मैंने तो मोहोब्बत की हैं – साहिर लुधियानवी


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तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ हैं तुमको
मेरी बात और हैं मैंने तो मोहोब्बत की हैं

मेरे दिल की मेरे जज़बात की कीमत क्या हैं
उलझे उलझे से खयालात की कीमत क्या हैं
मैंने क्यों प्यार किया तुमने ना क्यों प्यार क्या
इन परेशान सवालात की कीमत हैं
तुम जो ये भी ना बताओ तो ये हक़ हैं तुमको
मेरी बात और हैं मैंने तो मोहोब्बत की हैं

जिन्दगी सिर्फ मोहोब्बत नही कुछ और भी हैं
जुल्फ-ओ-रुखसार की जन्नत ही नहीं कुछ और भी हैं
भूख और प्यास की मारी हुयी इस दुनियाँ में
इश्क ही एक हकीकत नहीं कुछ और भी हैं
तुम अगर आँख चुराओ तो ये हक़ हैं तुमको
मैंने तुम से ही नहीं सब से मोहोब्बत की हैं

तुमको दुनियाँ के ग़म-ओ-दर्द से फुरसत ना सही
सबसे उल्फत सही मुझसे ही मोहोब्बत ना सही
मैं तुम्हारी हूँ यही मेरे लिये क्या कम हैं
तुम मेरे हो के रहो ये मेरी किस्मत ना सही
और भी दिल को जलाओ तो ये हक़ हैं तुमको
मेरी बात और हैं मैंने तो मोहोब्बत की हैं

– साहिर लुधियानवी

वो मेरा था ये बताना अजीब लगता है


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[audio https://dl.dropboxusercontent.com/u/9342368/anup_jalota_woh_mera_tha.mp3]

वो मेरा था ये बताना अजीब लगता है
अब उससे आँख मिलाना अजीब लगता है

जो ज़िन्दगी में कभी मेरा हो न पाया
अब उसका ख़्वाब में आना अजीब लगता है

बड़े ख़ुलूस से दावत तो उसने भेझी है
पर उसकी मेहफिल में जाना अजीब लगता है

था जिसका हाथ हमेशा हमारे हाथों में
अब उसका हाथ मिलाना अजीब लगता है

वो मेरा था ये बताना अजीब लगता है
अब उससे आँख मिलाना अजीब लगता है

મોરપિચ્છની રજાઈ ઓઢી…


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મોરપિચ્છની રજાઈ ઓઢી
તમે સૂઓને શ્યામ
અમને થાય પછી આરામ….

મુરલીના સૂરનાં ઓશીકાં
રાખો અડખે-પડખે
તમે નીંદમાં કેવા લાગો
જોવા ને જીવ વલખે
રાત પછી તો રાતરાણી થઇ
મ્હેકી ઊઠે આમ….

અમે તમારા સપનામાં તો
નક્કી જ આવી ચડાશું
આંખ ખોલીને જોશો ત્યારે
અમે જ નજરે પડશું
નિદ્રા-તંદ્રા-જાગૃતિમાં
ઝળહળભર્યો દમામ….

कुछ दिल ने कहा…


sharmila

कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं…
ऐसी भी बातें होती हैं,
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं…

लेता है दिल अंगड़ाइयां, इस दिल को समझाये कोई
अरमान ना आँखें खोल दें, रुसवा ना हो जाये कोई
पलकों की ठंडी सेज पर, सपनों की परियां सोती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं,
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं…

दिल की तस्सली के लिये, झूठी चमक झूठा निखार
जीवन तो सूना ही रहा, सब समझे आयी हैं बहार
कलियों से कोई पूछता, हंसती हैं वो या रोती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं,
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं…